शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव होना आम बात है, लेकिन जब देश की सबसे बड़ी फॉर्च्यून 500 कंपनियों में से एक ताश के पत्तों की तरह ढहने लगे, तो निवेशकों के कान खड़े हो जाते हैं। पिछले कुछ दिनों से राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports Ltd) के शेयरों में लगा लगातार लोअर सर्किट इसी कड़वी हकीकत को बयां कर रहा है। 3 जून 2026 को मार्केट रेगुलेटर SEBI ने एक ऐसा अंतरिम आदेश जारी किया, जिसने पूरे दलाल स्ट्रीट को हिलाकर रख दिया।
₹15.15 लाख करोड़ का ‘कागजी’ खेल!
SEBI की शुरुआती जांच में जो बात सामने आई है, वह हैरान करने वाली है। आरोप है कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच अपने रेवेन्यू (कमाई) को ₹15.15 लाख करोड़ तक बढ़ा-चढ़ाकर (Inflate करके) दिखाया। जांच के मुताबिक, कंपनी का लगभग 97% से 99% बिजनेस इसकी विदेशी सहायक कंपनियों (Subsidiaries), विशेषकर स्विट्जरलैंड की गोल्ड रिफाइनरी ‘Valcambi’ के जरिए होता दिखाया गया था, जो काफी हद तक संदिग्ध पाया गया है।
आसान शब्दों में कहें तो, जो सोना कंपनी का था ही नहीं, उसकी पूरी वैल्यू को अपनी बैलेंस शीट में टर्नओवर की तरह दिखा दिया गया। यही वजह है कि ₹4.23 लाख करोड़ का सालाना रेवेन्यू दिखाने वाली कंपनी का नेट प्रॉफिट महज ₹95 करोड़ (सिर्फ 0.02% मार्जिन) था, जिसने फॉरेंसिक ऑडिटर्स का ध्यान खींचा।
प्रमोटर पर बैन और PLI स्कीम पर खतरा
इस खुलासे के बाद SEBI ने कंपनी के प्रमोटर और एग्जीक्यूटिव चेयरमैन राजेश मेहता पर शेयर बाजार में किसी भी तरह की ट्रेडिंग करने पर तत्काल रोक लगा दी है। इसके अलावा, भारी उद्योग मंत्रालय भी कंपनी को एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए मिलने वाली सरकारी PLI (Production-Linked Incentive) स्कीम से बाहर करने की तैयारी में है। हालांकि, कंपनी प्रबंधन का कहना है कि यह केवल एक ‘कम्युनिकेशन गैप’ है, लेकिन बाजार इस सफाई को स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रहा है।
रिटेल निवेशकों के लिए सबक
इस पूरे संकट ने एलआईसी (LIC) जैसे बड़े संस्थागत निवेशकों के साथ-साथ लाखों रिटेल निवेशकों को अधर में छोड़ दिया है। राजेश एक्सपोर्ट्स का यह मामला हमें सिखाता है कि किसी कंपनी के सिर्फ बड़े टर्नओवर या ‘फॉर्च्यून 500’ के टैग को देखकर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। निवेश करने से पहले कंपनी के कैश फ्लो, प्रमोटर बैकग्राउंड और प्रॉफिट मार्जिन की बारीकी से जांच करना बेहद जरूरी है।






